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हे शारदे मां, हे शारदे मां, अज्ञानता से हमें तार दे मां... तू स्वर की देवी है संगीत तुझसे, हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे, हम हैं अकेले, हम हैं अधूरे, तेरी शरण हम, हमें प्यार दे मां | हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां... तू श्वेतवर्णी, कमल पे बिराजे, हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे, मन से हमारे मिटा दे अंधेरे, हमको उजालों का संसार दे मां | हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां... मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी, वेदों की भाषा, पुराणों की बानी, हम भी तो समझें, हम भी तो जानें, विद्या का हमको अधिकार दे मां | हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां...
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इतनी शक्ति हमें देना दाता, मनका विश्वास कमजोर हो ना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना
दूर अज्ञान के हो अँधेरे, तू हमें ज्ञान की रौशनी दे हर बुराई से बचके रहें हम, जीतनी भी दे भली ज़िन्दगी दे बैर हो ना किसीका किसीसे, भावना मन में बदले की हो ना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना
हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है, सहमा-सहमा सा हर आदमी है पाप का बोझ बढ़ता ही जाए, जाने कैसे ये धरती थमी है बोझ ममता का तू ये उठा ले, तेरी रचना का ये अंत हो ना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना
ये न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण फूल खुशियों के बांटे सभी को, सबका जीवन ही बन जाए मधुबन अपनी करुणा को जल तू बहा के, कर दे पावन हर एक मन का कोना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना
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